साधन-संपन्न समुदाय-सर्जन

हमारी सभी गतिविधियाँ कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की हमारी चार मुख्य प्राथमिकताओं में निहित हैं. हमारा धेय्य है - सकारात्मक कार्रवाई करना, अपने हितधारकों के साथ सम्मान से व्यवहार करना, हमारे द्वारा किए जाने वाले हर काम के लिए लगातार उच्च मानक लागू करना और उन सभी समुदायों में रचनात्मक भूमिका अदा करना, जंहा हम काम करते हैं।

हमारे सीएसआर के चार स्तंभ है - पर्यावरणीय स्थिरता, शिक्षा को बढ़ावा देना, महिला सशक्तीकरण और स्वच्छ भारत पहल। पर्यावरणीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए,

इंडस ने पर्यावरणीय-संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में मदद करने वाली परियोजनाएं शुरू की हैं। हम ऐसी परियोजनाओं से भी जुड़े हैं जो विशेष-शिक्षा और व्यावसायिक और आजीविका के अवसर प्रदान करने वाली शिक्षा को बढ़ावा देती हैं।

महिलाओं को सशक्त बनाने के हमारे अभियान के अंतर्गत, इंडस ने महिलाओं और अनाथों के लिए घरों और छात्रावासों की स्थापना में मदद की है। हम स्वच्छ भारत अभियान के हिस्से के रूप में निवारक स्वास्थ्य देखभाल और स्वच्छता को सक्रिय रूप से बढ़ावा देते हैं।

प्रतिबद्धता - जो मायने रखती है

सीएसआर के चार स्तंभ:

  • 1. पर्यावरणीय स्थिरता
  • 2. शिक्षा को बढ़ावा
  • 3. महिला सशक्तीकरण
  • 4. स्वच्छ भारत पहल

हमारा लक्ष्य और उदेश्य

हमने वोडाफोन फाउंडेशन के साथ वित्तीय साक्षरता और शिक्षा पर दो परियोजनाओं के लिए भागीदारी की है। इस परियोजना का लक्ष्य कुछ खास समूहों- एसएचजी, छोटे-उद्यमियों, किसानों, कारीगरों, ग्रामीण महिलाओं, शहरी और ग्रामीण गरीबों, शिक्षकों और छात्रों को आर्थिक-साक्षरता प्रदान करना है। हमरा लक्ष्य है कि कम-आय वर्ग वाले छात्रों के स्कूलों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाना. इसके लिए हमने कक्षाओं में प्रौद्योगिकी का प्रयोग बढ़ाया है. हमें विश्वास है कि आवेदन सहायता और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से गैर-अंग्रेजी बोलने वाले छात्रों में छात्रवृत्ति के बारे में जागरूकता बढ़ेगी.

डिजिटल साक्षरता प्रदान करना

हम ‘डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन’ के साथ साझेदारी में इस कार्यक्रम को चलाते हैं। इसका उदेशय देश के सबसे पिछड़े स्थानों में सामुदायिक सूचना संसाधन केंद्र स्थापित करना है। डिजिटल रूप से सुसज्जित केंद्र 25 स्थानों पर उपेक्षित समुदाय को डिजिटल साक्षरता और अन्य शैक्षिक और आजीविका के अवसर प्रदान करने वाले शिक्षा कार्यक्रमों में प्रशिक्षित कर रहे हैं। यह कार्यक्रम भारत के 14 राज्यों में चल रहाहै।

बालिकाओ को शिक्षित करना

‘आई-इम्पैक्ट’ के साथ साझेदारी में, यह कार्यक्रम सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों की लड़कियों को शैक्षिक अवसर प्रदान करने पर केंद्रित है। उन बालिकाओ को, जिनकी पारंपरिक रूप से स्कूली शिक्षा तक कोई पहुंच नहीं है। हमारा उद्देश्य है निरक्षरता के कुचक्र से निजात पाना। इस कार्यक्रम को हम स्थानीय स्तर पर समुदाय-आधारित शिक्षण केंद्रों के माध्यम से चलाते है। जहां पर लड़कियों को 5 साल तक सार्थक शिक्षा मिलती है, जो उनकी नियमित शिक्षा में प्रवेश सुनिश्चित करती है। वर्तमान में यूपी और पश्चिम बंगाल में इस तरह के 110 केंद्र कार्यरत हैं। इस इंडस और आई-इम्पैक्ट साझेदारी का लक्ष्य उन सभी ११० गांवों में, जिनमें 6-14 वर्ष के आयुवर्ग की स्कूली छात्राओं की संख्या अधिक है, प्राथमिक शिक्षा केंद्रों का समर्थन करना है।

जिंदिगीयो को प्रज्वलित करना

इंडस-टीईआरआई की भागीदारी का उदेशय गांवों में स्वच्छ और सस्ती प्रकाश व्यवस्था प्रदान करना है। इसके लिए हमने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल का इस्तेमाल किया है। जो कि सोलर-चार्जिंग स्टेशनों और सोलर सूक्ष्म-ग्रिड की स्थापना करने में अग्रसर है। यह गांवों में आजीविका के अवसर प्रदान करता है और सीओ2 उत्सर्जन को कम करने के लिए भी काम करता है। वर्तमान में इस परियोजना का परिचालन यू.पी. राज्य में है।

त्यागे हुए बच्चों का पुनर्वास

भारत के एसओएस चिल्ड्रेन्स विलेज बच्चों की वैकल्पिक देखभाल के लिए काम करता है। यह संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन की कन्वेंशन में बच्चो के अधिकार (यूएनआरसी) के अनुरूप काम करता हैं। यह परियोजना भारत में 14 स्थानों पर एसओएस बच्चों के गांवों के 28 परिवार के घरों में रहने वाले 280 बिना अभिभावक के और त्यागे गए बच्चों के खर्चों में योगदान करती है। ऐसे प्रत्येक परिवार में लगभग 10 बच्चे और एक एसओएस माँ होती है। इस परियोजना का उद्देश्य ऐसे 280 बच्चों को पौष्टिक भोजन, कपड़े, आश्रय, स्वास्थ्य-देखभाल और दवा जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना है। हम बच्चों का समग्र विकास और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए जरूरत के आधार पर क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों, करियर काउंसलिंग, साइकोसोशल काउंसलिंग, खेल और पाठ्येतर संबंधी गतिविधियों के माध्यम से और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हैं। यह बच्चों को उनकी पढ़ाई में उत्कृष्टता प्रदान करने में मदद करेगा।

हर बच्चा विधालय में, और अच्छे से सीख रहा।

इंडस टावर्स ने ‘प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन’ के साथ ‘लर्न आउट ऑफ़ द बॉक्स ‘(LOTB) कार्यक्रम के लिए भागीदारी की है। एल.ओ.टी.बी का लक्ष्य कक्षाओं में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से कम-आय वर्ग वाले स्कूलों के छात्रों की सीखने की छमता को बढ़ाना है। भारत के 9 राज्यों में फैले इस कार्यक्रम का लक्ष्य 1000 स्कूलों तक पहुँचने का है।

गाँव की बालिका की शिक्षा

सत्य भारती स्कूल कार्यक्रम के लिए सिंधु और भारती फाउंडेशन पार्टनर हैं।यह कार्यक्रम बालिकाओं पर विशेष ध्यान देने के साथ, देश के ग्रामीण हिस्सों में वंचित बच्चों को मुफ्त गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करने पर केंद्रित है। यह कार्यक्रम वर्तमान में भारत में छह राज्यों में फैला हुआ है। सत्य भारती स्कूल कार्यक्रम ने सफल कार्यान्वयन के 10 साल पूरे कर लिए हैं।मुफ्त शिक्षा के अलावा, स्कूल सभी छात्रों को मुफ्त मध्यान्ह भोजन, पाठ्य पुस्तकें, नोट बुक, जूते और स्टेशनरी भी प्रदान करते हैं।

डिजिटल साक्षरता में प्रशिक्षण

हमारी ‘हैंड इन हैंड’ (HIH) के साथ साझेदारी का विशिष्ट फ़ोकस डिजिटल प्रशिक्षण पर है। एच.आई.एच तमिलनाडु के तीन जिलों में 44,400 महिलाओं और 5,600 युवाओं को डिजिटल साक्षरता में प्रशिक्षण दे रहा है। हमें उम्मीद है की हमारी डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम मोबाइल ऐप के माध्यम से महिलाओं और युवाओं के बीच बेहतर मोबाइल साक्षरता और डिजिटल कौशल का प्रसार होगा।

मेधावी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति

हमारे 'ए वर्ल्ड ऑफ़ अपॉर्चुनिटी फाउंडेशन' (AWOOF) के साथ सहयोग का उदेशय भारत के भविष्य को सशक्त बनाना हैं। इस परियोजना का लक्ष्य जरूरतमंद और योग्य छात्रों की मदद करना है, ताकि भविष्य में उनके रोजगार के अवसर बढ़ सकें। यह परियोजना इस समय भारत के 19 राज्यों के छात्रों को स्नातक और स्नातकोत्तर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों पूरा करना में मदद कर रही है। इसके तहत योग्य छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ-साथ पुरस्कृत भी किया जाता है। सभी छात्रवृतियो का वार्षिक रूप से नवीनीकृत किया जाता है। यह छात्रों को शैक्षणिक पाठ्यक्रम पूरा होने संपूर्ण वित्त सहायता प्रदान करती है।

रिपोर्ट्स

पॉलिसीज़